दो आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ गुवाहाटी हाई कोर्ट में जनहित याचिका

गुवाहाटी

डीआईजी स्तर के दो आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ गुवाहाटी हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है|याचिका में शिकायत की गई है कि ये दो अधिकारी अपनी यूनिफार्म में डीआईजी के  लिए निर्धारित 3 स्टार लगा रहे है जो कि इंडियन पुलिस सर्विस (यूनिफार्म) रूल्स, 1954 का उल्लंघन है|

जनहित याचिका में तीन आईपीएस अधिकारियों के डीआईजी स्तर पर प्रमोशन की वैधता पर भी सवाल उठाए गए है| यह तीन पुलिस अधिकारी है – डीआईजी(सीडब्लूआर) दिगंत बोरा, डीआईजी(नार्थन रेंज) लाचित बरुआ और डीआईजी (सीआईडी) रौनक अली हजारिका|

अदालत में याचिका दाखिल करने वाले ने शिकायत की है कि जिन आईपीएस अधिकारियों पर सवाल उठाए गए है उन्हें बगैर योग्यता के अनिश्चितकाल के लिए प्रभारी डीआईजी नियुक्त किया गया है| जबकि प्रावधान के मुताबिक एक कनिष्ठ अधिकारी को उच्च पद का प्रभार ज्यादा से ज्यादा 39 दिनों के लिए सौंपा जा सकता है| असम पुलिस एक्ट 2007 के नियम के मुताबिक एक आईपीएस अधिकारी के डीआईजी बनने के लिए कम से कम 14 साल की नौकरी होनी चाहिए|

अदालत ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए इस संबंध में यूनियन ऑफ इंडिया को नोटिस जारी किया है| साथ ही राज्य सरकार और डीआईजी को भी नोटिस जारी किया गया है|

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