गुवाहाटी- अब असम सरकार बना रही है अलग जनसंख्या नीति

गुवाहाटी

अपने अद्वितीय सामाजिक, आर्थिक, जातिगत और भौगौलिक विविधता के आधार पर अगले साल असम सरकार  एक अलग जनसंख्या नीति बनाने जा रही  है। अब तक राजस्थान ही एक ऐसा राज्य रहा है जिसने अलग जनसँख्या नीति को लागू किया है।

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Dr Ilias Ali

अलग जनसँख्या नीति बनाने के लिए कमिटी का गठन करने वाले सर्जन तथा असम सरकार के नोडल ऑफीसर डॉक्टर इलियास अली ने कहा कि “चूँकि राज्य राष्ट्रीय जनसँख्या नीति 2000 का अनुसरण कर रहा है, विभिन्न हलकों का मानना है कि देश के अन्य राज्यों की तुलना में असम की सामाजिक, आर्थिक,जनजातीय और भौगौलिक भिन्नता की वजह से अलग नीति बनाने की अत्यंत आवश्यकता है”।

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असम की मौजूदा जनसँख्या 3 करोड़ से अधिक है जो 78,000 स्क्वायर किलोमीटर में फैली हुई है। राज्य के अल्पसंख्यक समुदाय के बीच परिवार नियोजन की आवश्यकता का प्रचार करने में कामयाब रहे डॉ. इलियासअली ने कहा, “इस नीति का मुख्य लक्ष्य शिक्षा के जरिए महिलाओं का सशक्तिकरण करना और रोजगार के मौके पैदा करना है। सभी 34 जिलों में महिलाओं के लिए ख़ास कॉलेज और शिक्षण संस्थान बनाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह नीति महिलाओं के लिए स्वयं सेवक समूह बनाएगी ताकि उन्हें आर्थिक रूप से सबल बनाया जा सके। उन्होंने कहा, “एक बार अधिकाँश महिलाए शिक्षित हो गई तो खासकर ग्रामीण इलाकों में लोगों का महिलाओं के प्रति नजरिया बदलेगा।”

डॉक्टर इलियास के अनुसार 32 प्रतिशत पुरुषों और 23 प्रतिशत महिलाओं का विवाह कानूनी तौर पर शादी के लायक उम्र होने से पहले ही हो जाता है। इसी वजह से राज्य में जनसँख्या विस्फोट होता है।

डॉक्टर इलियास ने कहा कि प्रस्तावित नीति के जरिए सरकार प्रोहिबिशन ऑफ चाइल्ड मैरिज एक्ट 2006 को सख्ती से लागू करेगी। इस नीति के तहत जो कर्मचारी महज दो बच्चों को ही जन्म देंगे उन्हें सरकार की तरफ से इंसेंटिव दिया जाएगा। अगर वे तीसरा बच्चा पैदा करते है तो मैटरनिटी लीव या चाइल्ड केयर लीव जैसी सुविधाओं से उन्हें वंचित होना पड़ेगा।”

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