धुबरी एसपी दिगंत बोरा को न्यायालय के अपराधिक अवमानना का नोटिस

गुवाहाटी उच्य न्यायालय ने जारी किया नोटिस. 20 जनवरी को न्यायलय में हाज़िर होने का आदेश 

गुवाहाटी

धुबरी के एसपी दिगंत बोरा के विरुद्ध गुवाहाटी उच्य न्यायालय ने, न्यायालय के अपराधिक अवमानना का नोटिस जारी किया है और उन्हें 20 जनवरी को न्यायलय में हाज़िर होने को कहा है.  गुवाहाटी उच्य न्यायालय के दो जजों के खंडपीठ ने उच्य न्यायालय में झूठी और भ्रमित हलफनामा दायर करने तथा कछार जिले में कांस्टेबल के 2401 पदों में नियुक्ति से सम्बन्धित दस्तावेजों से छेड़ छाड़ करने का संज्ञान लेते हुए धुबरी के एसपी दिगंत बोरा, आईपीएस, के विरुद्ध न्यायालय की अपराधिक अवमानना करने का नोटिस जारी किया है.

गुवहाटी उच्य न्ययालय के अधिवक्ता अमित गोयल ने याचिका करता की ओर से न्ययालय में दलील पेश करते हुए कहा कि दिगंत बोरा, आईपीएस, ने कछार जिले के एसपी रहेत हुए न्यायलय में एक झूठा हलफनामा दायर कर मूल रिकार्ड्स से याचिका करता का ओबीसी एवं एनसीसी सर्टीफिकेट हटा कर न्यायालय में पेश कर न्यायालय को गुमराह किया है. श्री बोरा द्वारा किया उक्त कार्य न्यायालय के अपराधिक अवमानना के अंतर्गत आता है, तथा न्यायालय को इस उच्य पद पर आसीन पुलिस अधिकारी को उच्य दंड देना चाहिए ताकि न्याय व न्यायालय पर सब का भरोसा बना रहे.

अधिवक्ता अमित गोयल की दलील सुन्ने के पश्चात न्यायमूर्ती सीआर शर्मा एवं न्याय मूर्ती श्रीमती डॉक्टर इन्द्रा साह की दो जजों की खंडपीठ ने दिगंत बोरा आईपीएस के विरुद्ध न्यायालय की अवमानना (अपराधिक) का नोटिस जारी किया है.

न्यायालय ने डीआईजी (दक्षिण रेंज ) को भी अपने आदेश में उक्त नियुक्ती से सम्बन्धित तमाम दस्तावेज़ को अपने कस्टडी में लेने का निर्देश दिया है.

पढ़ें पूरा मामला किया है – 

गौर तलब है की 25 वें असम पुलिस (ओ एन जी सी सिक्यूरिटी) बटालियन के 724 पदों, 24 असम पुलिस (आई आर) बटालियन के 675 पदों और असम पुलिस के विभिन्न बटालियनों में 1002 पदों में नियुक्ति को लेकर 20 फरवरी 2009 में एक विज्ञापन  छपा था। इस विज्ञापन को लेकर गुवाहाटी हाईकोर्ट में एक लेख आवेदन दाखिल किया गया था,  जिसमे आवेदक सुजीत कुमार पॉल ने माननीय न्यायलय को बतया था कि वह कुछ अन्य प्रार्थियों ने इन पदों के लिए परीक्षा दी थी और उन्हें अगले टेस्ट के लिए भी बुलाया गया था। उसके बाद 19 मई 2010 को अंतिम सूची जारी की गयी जिसमे कछार जिले के तहत कांस्टेबल पद के लिए 87 प्रार्थियों के नाम दिए गए। लेकिन उस सूची में यह नहीं दर्शाया गया कि किसका चयन आरक्षित श्रेणी में हुआ है। यहां तक कि चयन प्रक्रिया में आरक्षण के लिए आवश्यक प्रतिशत मिले है या नहीं यह भी नहीं दर्शाया गया था। आवेदक सुजीत कुमार पॉल समेत 23 वंचित प्रार्थियों ने चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका जताते हुए कोर्ट में लेख आवेदन दाखिल किया था जिसमे उल्लेख था कि विज्ञापन में कही गयी बातों और असम पुलिस मैन्युअल में शामिल नियुक्ति प्रक्रिया का अनुसरण नहीं किया गया है। याचिका कर्ताओं ने कोर्ट से अपील की थी इस चयन सूची को निरस्त किया जाए और प्रतिवादी पक्ष को निर्देश दे कि चयन सूची पुनः तैयार करे और उसी के आधार पर नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए। लेकिन इस लेख आवेदन के खिलाफ कोर्ट में हलफनामा दाखिल करते हुए धुबड़ी के तात्कालिक एसपी दिगंत बोरा ने आवेदन को बेबुनियाद बताया था।

गौरतलब है कि पिछली सुनवाई में सरकारी अधिवक्ता ने कोर्ट में एक सूची पेश की थी जिसमे चयनित प्रार्थियों द्वारा प्राप्त अंक दर्शाये गए थे। लेकिन वहां मार्किंग सिस्टम न तो विज्ञापन के अनुसार था और न ही आरक्षण रोस्टर के अनुसार। सुजित ने कोर्ट में पेश रिकॉर्ड पर हैरानी जताई थी चूँकि उन्हें सामान्य श्रेणी का बताया गया था जबकि उन्हों ने अपना ओबीसी और एनसीसी ‘सी’ सर्टिफिकेट भी जमा कराया था।6 अगस्त 2014 को सिंगल जज ने लेख आवेदन ख़ारिज कर दिया थ।

इस फैसले से आहत होकर पुनः आवेदन दाखिल किया गया। कोर्ट को एक बार फिर सुजीत ने बताया कि सर्टिफिकेट संलग्न करने के बावज़ूद न तो उन्हें ओबीसी प्रार्थी के तौर पर देखा गया और न ही अतिरिक्त 5 अंक दिए गए। कछार के एसपी दिगंत बोरा द्वारा दाखिल हलफनामा गलत और दुर्भावपूर्ण ढंग से पेश करते हुए पाया गया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने असली रिकॉर्ड पेश करने को कहा था लेकिन जो रिपोर्ट पेश की गयी थी वह कंप्यूटर पर बना हुआ रिकॉर्ड था। इसमें उल्लेख था कि आवेदक रूद्र पॉल समुदाय (ओबीसी) से है पर कास्ट सर्टिफिकेट और एनसीसी ‘सी’ सर्टिफिकेट रिकॉर्ड से गायब थे। प्रतिवादी पक्ष ने सुजीत के दावे के विपरीत सर्टिफिकेट नहीं होने की बात करते हुए कहा कि उन्हें अतिरिक्त 5 अंक नहीं दिए जा सकते। कछार के एसपी द्वारा पेश रिकॉर्ड के मद्देनज़र कोर्ट ने चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी की बात से इनकार करते हुए लेख आवेदन को ठुकरा दिया था।

इन सबके बावज़ूद सुजीत का कहना था कि अगर पहले हलफनामे के अनुसार सर्टिफिकेट जमा किये ही नहीं गए तो दूसरी बार उनका नाम ओबीसी श्रेणी में कैसे आया। इसे लेकर एक बार फिर सुजीत अदालत का दरवाजा खटखटा रहे है। इस बार लगता है उन्हें इन्साफ मिलेगा क्योंकि इस बार न्यायालय ने मामले की गंभीरता को समझते हुए एसपी दिगंत बोरा के खिलाफ न्यायालय का अवमानना करने का नोटिस जारी किया है.

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