गुवाहाटी उच्य न्यायालय ने IPS अधिकारी के खिलाफ चल रहा अपराधिक मामला किया खारिज

News desk/nesamachar

गुवाहाटी- साउथर्न रेंज के डीआईजी, आईपीएस अधिकारी अनुराग अगरवाल के खिलाफ चल रहे एक आपराधिक मामले को गुवाहाटी हाई कोर्ट ने रफा-दफा कर दिया है। अगरवाल के खिलाफ पानबाज़ार पुलिस थाने में इंडियन पैनल कोड की धारा 120(बी)/420/468/471 के तहत दर्ज मामले पर सुनवाई चल रही थी। हाई कोर्ट ने पाया कि पहली ही नज़र में आईपीएस अधिकारी के खिलाफ कोई केस नहीं बनता और कानूनी प्रकिया का दुरूपयोग न हो इसलिए कोर्ट ने मामले को रफा-दफा कर दिया है।

जस्टिस सी आर शर्मा ने पाया कि अगरवाल के खिलाफ मामला जारी रखना बेवजह उन्हें परेशान करना तथा कानून का दुरूपयोग करना होगा। अधिकारी के खिलाफ नूनमाटी में जमीन के एक टुकड़े को लेकर मामला दर्ज किया गया था जो उन्होंने सन 2011 में ख़रीदा था। अगरवाल ने गुवाहाटी हाई कोर्ट से मामले को रफा-दफा करने की गुहार लगायी थी।

अगरवाल के अधिवक्ता अमित गोयल ने पत्रकारों को बताया कि मार्च 2015 में कामरूप मेट्रो जिला उपायुक्त कार्यालय ने पानबाज़ार थाने में एफआईआर दर्ज करायी थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि जरुरी दस्तावेजों की सर्किल तथा एडीसी स्तर पर सही जांच नहीं की गई। फुल स्टाम्प ड्यूटी से बचने के लिए संपत्ति का सही मूल्यांकन नहीं किया गया।

गोयल ने कोर्ट से कहा कि अगरवाल का जमीन के मूल्य निर्धारण तथा बिक्री अनुमति में कोई हाथ नहीं था। उन्होंने कोर्ट को बताया कि सम्बंधित प्राधिकरण द्वारा जमीन पर तय स्टाम्प ड्यूटी का उन्होंने भुगतान किया है और अनुराधा से नूनमाटी तक 200 मीटर के दायरे में पड़ने वाली जमीन पर 75,00,000 प्रति बीघा आंचलिक मूल्य लागू होता है। जबकि यह जमीन 200 मीटर के दायरे से बाहर है। इसलिए मामला बेबुनियाद है।

अधिवक्ता ने कोर्ट से अपील की कि अगर अदालत को गुमराह करने वाला ये मामला आगे चलाया गया तो भारतीय संविधान के अधिनियम 21 के तहत यह मौलिक अधिकारों का हनन होगा।

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