गैस पाइपलाइन की निगरानी के लिए गेल अब ड्रोन तैनात करेगा

नई दिल्ली

बदलते समय, डिजिटल वर्ल्ड और सैटलाईट की इस दुनिया में हर काम का अंदाज़ बदल रहा है. ज़रा सोचिए जब आब आप के घरों, दुकानों, और ऑफिस की निगरानी के लिए गेट पर पहरेदार की जगह सीसीटीवी कैमरे ने ले ली है तो फिर बड़ी बड़ी कंपनियों की सोच तो उस से अभी ऊपर होगी. हम बात कर रहे हैं अब ड्रोन द्वरा पहरेदारी करने की. जी हाँ देश का सबसे बड़ा गैस ट्रांसपोर्टर गेल अपनी गैस पाइपलाइन की निगरानी को और पुख्ता करने के लिए पायलट बेसिस पर ड्रोन तैनात करने की सोच रहा है. कंपनी ने अपनी पाइपलाइनों की सुरक्षा को और अधिक चाकचौबंद बनाने के प्रती उठाई जा रहे कदमों के तहत यह फैसला किया है.drone gais pipe line-2

सार्वजनिक क्षेत्र की इस कंपनी ने जून 2014 में आंध्र प्रदेश में हुए एक विस्फोट की घटना के बाद अपनी पाइपलाइनों की सुरक्षा मानकों को बढाने के लिए अनेक कदम उठाए हैं. उक्त हादसे में कम से कम 18 लोग मारे गए थे. उसके बाद कंपनी ने अपनी पुरानी पाइपलाइनों को बदलने और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल सहित अनेक पहल की हैं.

गेल के डायरेक्टर आशुतोष कर्नाटक ने बताया कि हम मध्य प्रदेश की चंबल घाटी में 200 किलोमीटर लंबी एचबीजे पाइपलाइन के लिए ड्रोन का इस्तेमाल करेंगे.  अगले एक महीने के भीतर ड्रोन खरीदने का टेंडर जारी कर दिया जाएगा. ड्रोन का इस्तेमाल पाइपलाइन की पेट्रोलिंग के लिए किया जाएगा. जो पाइपलाइन में किसी तरह के अतिक्रमण और नुकसान पर नजर रखेगा.

इन ड्रोन का इस्तेमाल पाइप लाइन के इलाके में किसी तरह के अत्रिकमण या पाइप लाइन में सेंध की गतिविधियों पर निगरानी रखने के लिए किया जाएगा. इस तहत एक ड्रोन पाइप लाइन के ऊपर उड़ान भरेगा और फोटो के साथ-साथ अन्य आंकड़े एकत्रित करेगा.

अपनी 13,000 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन की सुरक्षा के लिए गेल सैटेलाइट मॉनिटरिंग का भी सहारा ले रहा है. 2014 को हुए एक्सीडेंट की जांच में पाया गया था, कि एक्सीडेंट होने का प्रमुख कारण सुरक्षा का कमजोर होना था. आशुतोष कर्नाटक ने बताया कि ड्रोन की कीमत 2.5 करोड़ रुपए के आसपास हो सकती है। फिलहाल गैस पाइपलाइन की सुरक्षा के लिए गेल मैनुअल पेट्रोलिंग का इस्तेमाल करता है.

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