असम में बाढ़ का कहर जारी, नगालैंड में भूस्खलन, हालात गंभीर

गुवाहाटी

जहां असम में बाढ़ का कहर जारी है वहीं नगालैंड में भूस्खलन से  हालात और  गंभीर हो गए हैं  हैं। ब्रह्मपुत्र नदी का पानी कई जिलों में खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है मोरीगांव जिले में स्थित पोबितोरा वन्यजीव अभयारण्य के करीब 60 फीसदी हिस्से में बाढ़ का पानी भर गया है। यह अभयारण्य एक सींग वाले गैंडों का आवास है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार बाढ़ से अभयारण्य की करीब 50 फीसदी आधारभूत संरचना को नुकसान पहुंचा है।  पोबितोरा वन्यजीव अभयारण्य को जोड़ने वाली सड़के बाढ़ के पानी में डूब चुकी हैं और कुछ जगहों पर बह भी गई हैं।

असम में बाढ़ का कहर जारी, नगालैंड में भूस्खलन, हालात गंभीर

इस बीच, मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने राज्य में बाढ़ के हालात की समीक्षा की और संबंधित विभागों के अधिकारियों से युद्ध स्तर पर राहत अभियान चलाने को कहा है। गुवाहाटी में एक उच्च-स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि वे प्रभावित लोगों तक पहुंच कायम करें और उन्हें राहत मुहैया कराएं।

इस बीच, असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक, लखीमपुर, गोलाघाट, मोरीगांव, बरपेटा और जोरहाट जिलों में बाढ़ के कारण 1.35 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। जोरहाट जिले में एक व्यक्ति और उसका बेटा बाढ़ के पानी में बह गए। अधिकारियों ने बताया कि ब्रह्मपुत्र नदी जोरहाट के नेमाटीघाट और धुबड़ी में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।

नगालैंड में भूस्खलन, मणिपुर का सड़क संपर्क बाधित

नगालैंड की राजधानी कोहिमा के निकट रविवार को हुए एक भूस्खलन के कारण एनएच-2 अवरूद्ध हो गया जिससे देश के अन्य भागों से मणिपुर का सड़क संपर्क बाधित हो गया। पूर्वोत्तर राज्यों में भारी वर्षा हो रही है, इसलिए डर है कि और भी भूस्खलन हो सकते हैं। मणिपुर के कई गांव, चंदेल और उखरूल जिलों के चंदोंग व रिहा गांव में धान के खेत और जन सुविधाएं पानी में डूब गए हैं। ग्रामीणों ने कहा कि मापीथल बांध भर जाने की वजह से बाढ की यह स्थिति बनी है। कुछ ग्रामीणों ने कहा,गिरजाघरों और स्कूलों में बाढ का पानी भर गया है और चंदोंग गांव पूरी तरह से पानी में डूब गया है। खेती पूरी तरह बर्बाद हो गई है। सेनापति जिले के सदर पहाडी अनुमंडल के लेईलोन-लेईमाखोंग स़डक पर कई पुल के क्षतिग्रस्त होने से इस सडक पर वाहन नहीं चल पा रहे हैं। गत एक जुलाई से इस अनुमंडल के 30 से अधिक गांव बाढ से प्रभावित हुए हैं। ग्रामीणों को आवश्यक वस्तुओं और दवाओं की कमी का सामना कर पड रहा है।

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