साहित्यकार महिम बोरा का निधन, साहित्य जगत में शोक

गुवाहाटी

असम के प्रसिद्ध कवि तथा ‘काथानीबाड़ी घाट” जैसी प्रसिद्ध लघु कहानी के रचयिता साहित्यकार महिम बोरा का आज निधन हो गया|  उनकी मृत्यु से साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई है| मृत्यु के वक्त वे 93 साल के थे|

ह्रदय रोग की वजह से गंभीर रूप से अस्वस्थ महिम बोरा को गुवाहाटी के जीएनआरसी अस्पताल में भर्ती कराया गया था| बुधवार की रात नगांव के आमोलापट्टी स्थित निवास में बोरा के अस्वस्थ हो जाने के बाद उन्हें गुवाहाटी के जीएनआरसी अस्पताल लाया गया था| डॉक्टर ने बताया कि प्रसिद्ध लेखक तथा कवि महिम बोरा ब्रेन हेमरेज की वजह से गहरे कोमा में चले गए थे|

26 जुलाई, 1924 में सोनितपुर में जन्मे महिम बोरा 1989 में डूमडूमा अधिवेशन के दौरान असम साहित्य सभा के अध्यक्ष चुने गए थे| बोरा को 2011 में पद्म श्री पुरस्कार से नवाजा गया था| 2001 में उन्हें उनके उपन्यास ‘एधानी माहिर हाही’ के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया| वही 1998 में वे असम वैली लिटरेरी अवार्ड से नवाजे गए थे|

कवि तथा लेखक महिम बोरा की कुछ प्रसिद्ध रचनाए है – काथानीबाड़ी घाट(1961), बोहुभूजी त्रिभुज(1967), आई नादिर सोटे (1975), मोई पिप्पली आरू पूजा(1967), राती फूला फूल(1977), बरजात्री(1980), रंगजिया(1978)|

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