एकल विद्यालय अभियान का परिणाम कुम्भ माजुली में संपन्न

माजुली    

DSC05198By- Ravi Ajitsariya 

विश्व के सबसे बड़े नदी द्वीप माजुली में राष्ट्रिय स्वयंसेवी संस्था वन बंधू परिषद् ने अपने अभियान एकल विद्यालय अभियान के तहत 29,30, और 31 जनवरी को पूर्वोत्तार भाग का एक परिणाम कुम्भ का सफलतापूर्वक आयोजन किया, जिसमे पूर्वोत्तर भाग के लगभग 17 जिला इकाइयों के पदाधिकारी एवं पूर्णकालीन कायकर्ता उपस्थित थे l

इस कुम्भ में एकल अभियान ट्रस्ट के अध्यक्ष बजरंगलाल बागरा, सह-संगठन प्रभारी अजय परिक, वनबन्धु संगठन के पूर्वोत्तर के चेयरमैन सुभाष अगरवाल बतोर सम्मानीय अथिति उपस्थित थे l  इस परिणाम कुम्भ का संचालन गुवाहाटी चेप्टर के अध्यक्ष पवन अगरवाल ने किया, और सत्र संचालन किया गुवाहाटी भाग के सचिव विवेक अगरवाल l

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वन बंधू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अरुण बजाज ने अपनी देखरेख में इस परिणाम कुम्ब को सफलतापूर्वक अंजाम दे कर माजुली द्वीप पर एकल विद्यालय, राष्ट्रिय आरोग्य फाउंडेशन द्वारा किये जा रहें कार्यों को गति प्रदान की है l ‘एकल तैयार है’ नामक थीम पर घुमती हुई परिचर्चाएं, संगठन के विभिन्न बिन्दुओं पर आयें हुए कार्यकर्ताओं के विचार उपस्थित अधिकारीयों ने गंभीरता से सुने, और समस्याओं का निवारण भी किया l उत्तर कमलाबाड़ी सत्र के सत्रधिकार जनार्धन देव गोस्वामी के सानिध्य में चला यह तीन दिवसीय कुम्भ में सभी ने एकल अभियान के विस्तार और सशक्त बनाने पर सभी ने जोर दिया l

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उल्लेखनीय है कि विश्व के इस सबसे बड़े नदी द्वीप पर एकल विधालय अभियान के तहत 210 स्कूलों का सफलतापूर्वक संचालन हो रहा है l एकल अभियान द्वारा किये गए इस प्रयासों से उत्तर कमला बाड़ी सत्र के सत्राधिकार प्रभु जनार्दंदेव गोस्वामी के आलावा गोडमुड़ सत्र के सत्र्धिकार प्रभु हरिदेव गोस्वामी और एलेंगी सत्र के सत्र्धिकार प्रभु भवानंद गोस्वामी ने एकल अभियान को हर संभव सहायता देने का अस्वासन भी दिया l आये हुए प्रतिनिधियों ने अपने-अपने अंचल की छाया चित्र प्रदर्शनी भी कुम्भ स्थल पर लगाई, जिसको भरपूर रूप में सराहा गया l

माजुली टापू का प्राकृतिक नजारा देखने, इस समय देश विदेश से सैलानी भरपूर मात्र में आ रहें है l यह टापू जोरहट से 11 किलोमीटर दूर स्थित निमाटीघाट से लगभग 19 किलोमीटर दूर है, जिसकों घाट से नाव से पंहुचा जा सकता है l लगभग एक घंटे के सफ़र के पश्चात यात्रियों को माजुली स्थित अस्थाई घाट पर उतरना पड़ता है l उल्लेखनीय है कि माजुली असम में वैष्णव धर्म के प्रचार और प्रसार के एक महत्वपूर्ण केंद्र है, जिसकी स्थापना 15वीं सदी में असमिया संत, धर्म प्रचारक श्रीमंत शंकरदेव ने की थी l यहाँ श्रीमंत शंकरदेव ने करीब 500 से ज्यादा सत्रों(पूजा घर), उस समय की थी l

    

समय और काल के बाद अब माजुली में करीब 64 सत्र आज भी बनें हुए है, जहाँ वैष्णव धर्म का प्रचार प्रसार किया जाता है l यहाँ के लोग मिसिंग और असमिया भाषा बोलतें है l इस नदी द्वीप की खासियत यह है कि यहाँ पर लोग चावल की खेती में यूरिया या कृत्रिम खाद का उपयोग नहीं करतें है l एक प्रदुषण मुक्त वातावरण माजुली में हमेशा विराज करता है l इस द्वीप की कुल जनसँख्या करीब 1.5 लाख है l नदी के किनारों पर बनें हुए घरों को हर वर्ष आने वाली बाढ़ से बचाने के लिए, जमीन के दस फीट ऊँचे मचान पर बनाएं गएँ है l कृषि पर आधारित यहाँ का जनजीवन, नदी के बदलते बहाव से बड़े पैमानें पर हो रहें कटाव से बाधित हो रही है l

इस वैष्णवधर्म  पीठ पर वन बंधू परिषद् द्वारा संचालित एकल अभियान ने अपने पञ्च सूत्रीय कार्यक्रम के तहत शिक्षा,आरोग्य, स्वभ्लंबन, ग्राम विकास और संस्कार प्रदान करने के लिए एक बार फिर उपस्थित दर्ज करवाई है l संगठन ने माजुली में पूर्वोत्तर संभाग में 2020 तक 7000 स्कूलों और भारत में 1 लाख स्कूलों को चलाने का संकल्प लिया है l उल्लेखनीय है कि माजुली द्वीप श्रीमंत शंकरदेव द्वारा स्थापित वैष्णव धर्म के अंतर्गत स्थापित सत्रों और नामघरों की एक विशाल श्रंखला बनी हुई है l

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