क्या राष्ट्रीय और प्रदेश बीजेपी में है आतंरिक मतभेद ?

गुवाहाटी

असम में बीजेपी की सरकार बन चुकी है और मंत्रिमंडल का शपथ ग्रहण भी हो चुका है। लेकिन इन सबके बीच कल आयोजित शपथ ग्रहण के भव्य समारोह में राष्ट्रीय और प्रदेश दोनों ही  स्तर पर बीजेपी में आतंरिक मतभेद और फूट पड़ने की झलक देखी गई।

बेहद ही भव्य ढंग से कल सर्वानंद सोनोवाल और उनके मंत्रिमंडल के 10 मंत्रियों को पद व गोपनीयता की शपथ दिलाई गई। इस समारोह में भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी समेत अन्य राष्ट्रीय नेता और एनडीए शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री भी उपस्थित थे। शपथ ग्रहण के अंत में एनडीए शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों तक को अपना वक्तव्य रखने का मौका दिया गया जबकि पार्टी के वयोवृद्ध तथा वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को भाषण के लिए आमंत्रित नहीं किया गया। ऐसे में सवाल यह है कि क्या 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान नरेंद्र मोदी को चुनाव समिति का अध्यक्ष बनाए जाते वक्त जिस तरह आडवाणी को उपेक्षित किया गया था क्या आज भी पार्टी में उनकी उपेक्षा होती है। आपको याद होगा उस वक्त नाराज होकर आडवाणी ने पार्टी के सभी पदों से भी इस्तीफा दे दिया था। कल एक बार उनकी फिर से उपेक्षा किए जाने से राष्ट्रीय पार्टी में पड़ी दरार भी नजर आने लगी है।

इधर प्रदेश इकाई में भी फूट पड़ने के आसार दिख रहे है। कल के भव्य  समारोह में प्रदेश बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष सिद्धार्थ भट्टाचार्जी नदारद रहे। उन्हें पार्टी की ओर से समारोह में उपस्थित रहना का निमंत्रण ना मिलना यही बात साबित करता है कि कहीं न कहीं पार्टी में आतंरिक मतभेद है। हालांकी हम ने इस बारे में सिद्दार्थ भट्टाचार्जी से बात करने के लिए उन से सम्पर्क साधने का प्रयास किया लेकिन सम्पर्क नहीं हो सका I

 

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