डिमा हसाव- पत्थर महल के आवंटन में व्यापक घोटाला

गुवाहाटी

डिमा हसाव जिले में पत्थर महल के आवंटन के नाम पर व्यापक घोटाला का आरोप लगाते हुए सामाजिक कार्यकर्ता जितुल डेका ने गुवाहाटी हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की है। इसी सिलसिले में गुवाहाटी हाई कोर्ट ने असम सरकार, असम के डीजीपी, एन सी हिल्स के डीएफओ, डिमा हसाव के एसपी, हफलांग पुलिस थाने के ओसी, सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय और चार अन्य लोगों को नोटिस जारी किया है।

Stone quarry- 2जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि उत्तर कछार पर्वतीय स्वायत्त शाषी परिषद ख़ास तौर से परिषद के मुख्य कार्यकारी सदस्य ने मनमर्जी से बगैर कोई विज्ञापन जारी किए या नीलामी की प्रक्रिया के पत्थर महल को अपने घनिष्ठ साथी के नाम आवंटित किया। इसलिए मामले पर हस्तक्षेप की आवश्यकता है। इसके अलावा अवैध मुनाफा कमाने के इरादे से चोरी-छिपे पत्थर महलों को कौड़ियों के भाव में इन लोगों को दिया गया। वहीँ ये महलदार इन पत्थर महलों के जरिए भारी मुनाफा कमा रहे हैं। परिषद के कर्मचारी भले ही प्राप्य वेतन से वंचित है लेकिन अपनी स्वार्थ पूर्ति के लिए सीईएम ने राज्य का नुकसान कर सठिक मूल्य से काफी कम भाव में पत्थर महल अपने घनिष्ठ के नाम कर दिए।

याचिका में कहा गया है कि परिषद के सीईएम देपोलाल होजाई ने डिमा हसाव के सभी पत्थरों का काम अपने घनिष्ठ साथी पवित्र नुनिसा को 31 मई 2008 से 30 मई 2013 तक की अवधि के लिए सौंपा था। सालाना महज 1 करोड़ में यह सौदा हुआ था। उस समय परिषद के सीईएम रहे होजाई ने पवित्र नुनिसा को बगैर निविदा आमंत्रित किए या नीलामी प्रक्रिया के पत्थर महल आवंटित किया।

पवित्र नुनिसा जो उस समय महज़ एक ऑटो ड्राईवर था आज करोड़पति है। मौजूदा नुनिसा नोएडा में एक कमर्शियल काम्प्लेक्स और विदेशी कारों का मालिक है। इससे साफ है कि यह गाढ़ी कमाई उसने पत्थर महल से ही की है।

Stone quarry-1जिस दौरान पवित्र नुनिसा पत्थर महल चला रहा था उसी दौरान देपोलाल होजाई का सीईएम के तौर पर कार्यकाल समाप्त हुआ। उनकी जगह देबोजित थाओसेन ने ले ली। थाओसेन भी होजाई के ही नक्शे-कदमों पर चल पड़े। उन्होंने पूर्व ठेका रद्द कर दिया लेकिन पवित्र नुनिसा के नाम पर पत्थर महल जारी रहा।

अभिजीत नुनिसा नामक एक और शख्स को भी अवैध रूप से बेहद कम कीमत में यानी 1 करोड़ 50 लाख में 15 जुलाई 2011 से 10 साल के लिए पत्थर महल आवंटित किया गया। मौजूदा डिमा हसाव के सभी पत्थर और बोल्डर महल चंद्रजीत सिंह के नियंत्रण में है जो अभिजीत नुनिसा के नाम पर काम-काज चला रहे है।

इस तरह की गड़बड़ी को देखते हुए 10 दिसंबर 2015 को हाफलांग पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी के पास एक एफआईआर दर्ज करायी गयी। भ्रष्टाचार निरोधक कानून 1988 की धारा 13 के तहत धारा 409/418/420/468/120(बी) के अंतर्गत 92/2015 नंबर का मामला दर्ज किया गया।

आवेदक की ओर से अधिवक्ता अमित गोयल ने हाई कोर्ट को बताया कि चूँकि पत्थर महलों के आवंटन में प्रभावशाली लोगों का हाथ है इसलिए एफआईआर दर्ज होने के बाद ही मुख्य जांच अधिकारी जो की डिमा हसाव के पुलिस अधीक्षक थे, उनका फ़ौरन तबादला कर दिया गया। मामले पर सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश टी. वाईफाई और जस्टिस एम आर पाठक की पीठ ने सरकार को निर्देश दिया कि वह जांच और जांच दल में दखल न दें । इसके अलावा कोर्ट ने सरकार को अगली सुनवाई में स्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

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