नोटबंदी- 140 करोड़ का काला धन बदल गया 430 किलो सोने में, पढ़िए कैसे

नोएडा

नोएडा स्थित श्रीलाल महल लिमिटेड कंपनी ने नोटबंदी के बाद 140 करोड़ रुपये के कालाधन को 430 किलो सोने में बदल लिया. नोटबंदी के बाद कालाधन को सफेद करने के इस सबसे बड़े खेल का पर्दाफाश डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआइ) नोएडा की एक छापामारी के बाद हुआ है. जूलरी एक्सपोर्ट के लिए मंगाए गए सोने को कंपनी ने अवैध तरीके से भारतीय बाजार में बेच दिया.

डीआरआइ की टीम ने कंपनी के नोएडा और दिल्ली के कई ठिकानों पर छापेमारी कर 15 किलो सोने के आभूषण, 80 किलोग्राम चांदी की छड़ें और 2.60  करोड़ रुपये नकद जब्त किया. डीआरआई द्वारा बरामद नकदी में 2.48 करोड़ रुपये के एक हजार और पांच सौ के पुराने नोट हैं, जबकि 12 लाख रुपये 2000 और 500 के नए नोट में हैं.

नोएडा में डीआरआइ पांच लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है. डीआरआइ अधिकारी ने बताया कि नोएडा एसईजेड के फेज दो में श्रीलाल महल लिमिटेड कंपनी विदेश से शून्य एक्साइज पर सोना मंगाकर उसके गहने तैयार करती रही है. यहां तैयार सोने के जेवर जिसे सिर्फ एक्सपोर्ट किए जा सकते थे. 8 नवंबर को नोटबंदी के बाद कंपनी ने 430 किलोग्राम सोना मंगाया. जिसे एक्सपोर्ट करने की बजाय भारत के घरेलू बाजार में बेच दिया. बताया जा रहा है कि इसकी कीमत अनुमान के अनुसार 140 करोड़ रुपये है.

डीआरआइ को जानकारी मिली है कि जिस फर्म के जरिये एमएसटीसी से सोना खरीदा गया, उसी फर्म के माध्यम से श्रीलाल महल ने पुराने नोट के बदले भारतीय बाजार में सोना बेच दिया. डीआइआइ अधिकारी अब जांच में जुटे हैं कि भारत में किन-किन लोगों को सोना बेचा गया है. हेराफेरी के बारे में केंद्र सरकार समेत आयकर विभाग व अन्य केंद्रीय एजेंसियों को जानकारी दे दी गई है.

दिल्ली की डीआरआइ टीम ने 19 दिसंबर को नोएडा के एनएसईजेड स्थित सोना एक्सपोर्टर कंपनी महालक्ष्मी जूलर्स में छापा मारा था. इसमें पता चला था कि दुबई से 150 किलोग्राम सोना इम्पोर्ट किया गया था, लेकिन एक्सपोर्ट के नाम पर तांबे की बनी जूलरी पर सोने की पोलिश कर दिल्ली कार्गो पर भेज दिया गया. इम्पोर्ट सोना को काला धन खपाने के लिए भारतीय बाजार में बेंच दिया गया था. डीआरआइ टीम ने सोना पोलिश  तांबे के 40 किलोग्राम सोने की जूलरी को जब्त भी किया था. इसके बाद से ही डीआरआइ के निशाने पर नोएडा विशेष आर्थिक जोन में स्थित ज्वैलरी निर्माण कंपनियां आ गई थीं.

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