ब्रह्मपुत्र साहित्य महोत्सव का शुभारंभ

गुवाहाटी

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकश जावड़ेकर ने शनिवार को झंडी दिखाकर ब्रह्मपुत्र साहित्य महोत्सव का शुभारंभ किया| इस मौके पर उन्होंने साहित्य को सांस्कृतिक निवेश का माध्यम करार देते हुए कहा कि राष्ट्र की प्रगति में साहित्यिक-सांस्कृतिक क्षेत्र का विकास भी महत्वपूर्ण है|

श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्र में शनिवार से शुरू हुए ब्रह्मपुत्र साहित्य महोत्सव में जावड़ेकर बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित थे| उन्होंने साहित्य और संस्कृति को बढ़ावा देने के केंद्र सरकार के प्रयासों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार नई पीढ़ी के साहित्यकारों के लिए और भाषाई साहित्य के विकास को सुनिश्चित करने के लिए विशेष पहल कर रही है|

इस अवसर पर मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण है और इसके माध्यम से समाज के सशक्त और कमजोर दिशाओं का प्रतिफलन होता है| जीवन के अनिश्चित समय में साहित्य के जरिए ही पाठकों को रोशनी दिखाई देती है और साहित्य के चरित्रों के साथ बातचीत कर सकते है तथा मन में उठे सवालों का समाधान खोज सकते है| उन्होंने असम के सामाजिक जीवन में ब्रह्मपुत्र की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि असमिया जाति को गढ़ने में इस नद की भूमिका विश्ववासियों के सामने साहित्य के माध्यम से प्रदर्शित करना होगा| ब्रह्मपुत्र असमिया का गौरव का प्रतिक है और राज्य के कला-साहित्य जगत में इस नद की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता| इस नद ने कई महान ग्रंथों के सृजन के लिए साहित्यकारों को प्रेरित किया है|

सोनोवाल ने उम्मीद जताई कि ब्रह्मपुत्र साहित्य उत्सव न सिर्फ असम बल्कि समूचे पूर्वोत्तर के युवाओं को देश-विदेश के प्रसिद्ध साहित्यकारों से मत-विनिमय करने का अवसर प्रदान करेगा और इस आयोजन से उनका उत्साहवर्द्धन भी होगा|

राज्य में पहली बार नेशनल बुक ट्रस्ट ऑफ इंडिया और असम प्रकाशन परिषद के सहयोग से आयोजित इस साहित्य उत्सव में विश्व के 10 देश सहित भारत के विभिन्न प्रांतों के प्रसिद्ध लेखक और साहित्यकार भाग ले रहे है|

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