त्रिपुरा : बीजेपी की ऐतिहासिक जीत क्या कहती है

अगरतला

By Manzar Alam, Founder Editor, NESamachar, Former Bureau Chief ( northeast), Zee News 

त्रिपुरा में बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज कर के यह साबित कर दिया है कि अभी मोदी नाम की आंधी का जोर कम नहीं हुआ है. इस आंधी में अब भी इतना जोर है कि इस के रास्ते में जो आता है उसे उखाड़ फेंकता है. 25 वर्षों तक राज्य में सत्तारूढ़ वाम दल ने कभी सोचा भी नहीं था कि जिस पार्टी का एक भी विधायक नहीं है वह राज्य में केवल जीत ही नहीं दर्ज करगी  बल्की सरकार भी बना लेगी  वह भी अपने दम पर.

इस जीत का श्रेय बेशक प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को जाता है. लेकिन उन नेताओं को भी नज़र अंदाज़ नहीं किया जा सकता है जिन्हों ने ज़मीनी स्तर पर हल चलाया था. इन नेताओं में असम के मंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा  और  बीजेपी के महा सचिव राम माधव का नाम मुख्य है.

शून्य से शिखर तक के बीजेपी के इस सफ़र से सब से बड़ी सीख कांग्रेस को लेनी होगी जो ठीक बीजेपी के विपरीत शिखर से शून्य की ओर गिरती जा रही है. त्रिपुरा में वाम मोर्चा की हार बंगाल में ममता बनर्जी के लिए भी एक बड़ी चुनौती  बन्ती दिख रही है.

पूर्वोत्तर के इन तीन राज्यों में हुए चुनाव ने 2019 के लोक सभा चुनाव का बिगुल बजा दिया है. इस बिगुल की आवाज़ शायद हर राजनीति पार्टी सुन रही होगी. साथ ही इन तीनो राज्यों के आये नतीजे जो कुछ कह रहे हैं वह भी उन्हें समझ में आ रहा होगा.

इन तीनो राज्यों में जिस तरह चुनाव प्रचार हुए और जो नतीजे आये हैं, उस की गहराई को समझा जाए तो साफ़ है कि जनता, पार्टी नहीं बल्की नरेंद्र मोदी के रूप में देश  का एक ऐसे  ताकतवर नेता को देख रही है जो दिल्ली  में बैठ कर देश भी चला सकता है और राज्य पर भी अपनी पैनी नज़र रख सकता है.

आप को याद होगा की 2014 के लोक सभा चुनाव में नरेंद्र मोदी ने नारा दिया था “कांग्रेस मुक्त भारत” का. यह नारा उस के बाद हर विधान सभा चुनाव में दुहराया गया और अब ऐसा लगने लगा है कि यह नारा सच के करीब पहुँच गया है. अगर अब भी कांग्रेस कमर नहीं कसती है तो देश के इतिहास में एक और पन्ना जुट जाएगा जिस का शीर्षक होगा ” कांग्रेस मुक्त भारत”.

यह बातें हम नहीं कह रहे हैं, बल्क़ि यह तो करवट ले रही देश की राजनीती ब्यान कर रही है,  जिसे जनता तो समझ रही है शायद विरोधी दल भी समझ रहे हैं लेकिन शायद उन्हें कोइ तोड़ नज़र नहीं आ रहा है, जो इस आंधी को रोक सके.

अपना लेख खत्म करने से पहले एक और बात बताता चलूँ.  चुनाव अभियान के दौरान हम ने  नागालैंड, मेघालय और त्रिपुरा तीनो राज्यों का दौरा किया. मतदाताओं से जब यह पूछा करते थे कि आप लोग किस की सरकार बनाना चाहते हैं, ” तो जवाब मिलता था “नरेंद्र मोदी की” . जब यह पूछते थे कि किस पार्टी की सरकार बनाना  चाहते हो, तो जवाब मिलता था ” नरेंद्र मोदी की पार्टी की” .

अब आप भी जनता की मानसिक्ता को समझने का प्रयास करेंगे तो एहसास होगा कि जनता के बीच पार्टी के रूप में  बीजेपी भी अपना छाप उतनी  नहीं छोड़ पाई है जितनी  के जनता के बीच प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी  छाप छोड़ी  है.  क्यंकि लोग बीजेपी को नहीं नरेंद्र मोदी को जानते हैं, बीजेपी की सरकार से उन्हें मतलब नहीं उन्हें नरेंद्र मोदी की सरकार चाहिए.  पहली बार ऐसा देखने को मिला की विधान सभा चुनाव में लोगों ने स्थानीय नेता को नहीं  बल्की देश के प्रधान मंत्री को देखा है, और उसे वोट दिया है.

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