बंग्लादेशी हिंदूओं को भारतीय नागरिकता का विरोध, 28 संगठन एकजुट

गुवाहाटी

पड़ोसी देश छोड़कर भारत आए हिंदूओं को भारतीय नागरिकता प्रदान करने के केंद्र के पहल का आसू समेत राज्य के 28 संगठनों ने विरोध करने का फैसला लिया है| धार्मिक प्रताड़ना की वजह से अपना देश छोड़कर भारत में बसने आए इन लोगों को केंद्र भारतीय नागरिकता प्रदान करना चाहता है|

आसू के मुख्य सलाहकार समुज्ज्वल कुमार भट्टाचार्य की अगुवाई में इन 28 संगठनों ने सांझा बैठक की| इस बैठक में केंद्र सरकार द्वारा  लाए गए विधेयक के खिलाफ एकजुट होकर खड़े रहने तथा किसी भी सूरत में 25 मार्च 1971 के बाद भारत आए हिंदू हो या मुसलमान किसी भी विदेशी नागरिक को ग्रहण नहीं करने का निर्णय लिया|

इन संगठनों द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किया गया ज्ञापन, संशोधित नागरिकता कानून विधेयक के लिए बनी सर्वदलीय संसदीय समिति के समक्ष रखा जाएगा|

संगठनों की सांझा बैठक के बाद प्रेस को संबोधित करते हुए भट्टाचार्य ने कहा, “यह विधेयक कुछ और नहीं बल्कि असम पर अवैध बांग्लादेशियों का पूरा बोझ डाल देने का बीजेपी का षड्यंत्र है| केंद्र ने जबरदस्ती यह बोझ डालने की कोशिश की तो जोरदार आंदोलन छेड़ा जाएगा|” उन्होंने कहा, “अब तक देश के लिए असम जैसे एक छोटे से राज्य ने यह असहनीय बोझ ढोया है पर अब और नहीं| धर्म के नाम पर नागरिकता देकर केंद्र सरकार राजनीतिक षड्यंत्र रच रही है जिसका उद्देश्य स्थानीय लोगों को अल्पसंख्यक बनाना है जो कभी नहीं होने दिया जाएगा|

विजन डॉक्यूमेंट और असम समझौते को लागू करने की चुनौती देते हुए भट्टाचार्य ने कहा, “असमिया के अस्तित्व की रक्षा के लिए जनता भारी मतों से बीजेपी की सरकार लाई है और अब विदेशी नागरिकों का बोझ डालने के बजाए असम समझौते के तहत स्थानीय लोगों को संवैधानिक रक्षा कवच देने की व्यवस्था करे| अगर यह विधेयक पास हो जाता है तो यह असम की जनता के साथ अन्याय होगा| एनआरसी के नवीकरण की प्रक्रिया आखिरी चरण में है| केंद्र को असम समझौते का सम्मान करना चाहिए|

वही अखिल असम ट्राइबल संघ, अखिल बोड़ो छात्र संघ, अखिल राभा छात्र संघ, अखिल तिवा छात्र संघ आदि संगठनों ने विधेयक को राज्य के स्थानीय लोगों के विरुद्ध बताया|

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