असम महिला विश्वविद्यालय मुद्दा- विधान सभा से संसद तक

नई दिल्ली / गुवाहाटी

‘असम महिला विश्वविद्यालय’ का मुद्दा असम विधान सभा से ले कर दिल्ली में संसद भवन तक गूँज रहा है. आज ‘असम महिला विश्वविद्यालय’ के समर्थन में संसद भवन परिसर में स्थित गांधी स्टेच्यू के पास कांग्रेस सांसदों ने  केंद्र सरकार का विरोध प्रदर्शन किया.  कांग्रेस सांसदों ने हाथ में पोस्टर ले रखे थे जिस पर लिखा था ‘महिलाओं की विरोधी भाजपा’ और ‘असम महिला विश्वविद्यालय बचाओ’.  कांग्रेस सांसदों ने ‘बेटी बचाओं-बेटी पढ़ाओं’ के सरकारी नारों को भी खोखला बताया.

बता दें कि कांग्रेस सांसदों से पहले असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने भी राज्य की भाजपा सरकार और केंद्र सरकार पर इस मुद्दे को ले कर निशाना साधा है. तरुण गोगोई का कहना है कि ‘असम महिला विश्वविद्यालय’ महिलाओं को सशक्त करने का मेरा ड्रीम प्रोजेक्ट था.

 

असम महिला विश्वविद्यालय मुद्दा- विधान सभा से संसद तक

उधर इन सब के जवाब में असम के शिक्षा मंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा ने इस मुद्दे को कांग्रेस के सिर मढ़ दिया  और कहा कि  यह समस्या तो गोगोई सरकार की देन है जिस का खाम्याजाह आज की बीजेपी सरकार भुगत रही है.  कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए शिक्षा मंत्री ने विधान सभा सदन में दिए अपने एक ब्यान में कहा कि महिला  विश्वविधालय के लिए बजाए  कुलपति नियुक्त करने के मेंटर  नियुक्त किया जिस की क़ानून में कोई प्रावधान नहीं है.

शिक्षा मंत्री ने कहा कि विश्वविधालय के तमाम शिक्षक, अधिकारी और कर्मचारी ठेके पर अथवा अनौपचारिक तौर पर नियुक्त किये गए हैं. ऐसे में यदी सरकार नई नियुक्तियां करती है तो सभों की नौकरी खतरे में पड़ सकती है.  इस लिए बजाये  राजनीती और आन्दोलन करने के कोई ऐसा रास्ता निकालना होगा जिस से कि समस्या का समधान हो सके और  किसी को कोई नुक्सान  भी न हो.

आप को बता दें कि ‘असम महिला विश्वविद्यालय’ पूर्वोत्तर में पहला महिला विश्वविद्यालय है.  ‘असम महिला विश्वविद्यालय’ की छात्राएं 19 मार्च से हड़ताल पर हैं.  छात्राएं  स्थायी चांसलर की मांग कर रही है.

इसके अलावा ‘असम महिला विश्वविद्यालय’ के विकास के लिए बुनियादी ढांचे, सुविधाएं और स्थायी फैकल्टी स्टाफ की नियुक्ति की मांग कर रही है.  छात्राओं का कहना है कि विश्वविद्यालय में पाठ्यक्रम को पूरा करने के लिए बहुत-सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

छात्राओं ने असम सरकार को चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों को नहीं पूरा किया तो वे आंदोलन शुरू करेंगी.  इस विरोध प्रदर्शन में असम के कॉलेजों की स्टूडेंट्स शामिल हैं.

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