असम के चाय उद्योग पर संकट

Ujjal Chiarngia/nesamachar.in

GAURAV TWEET कुछ दिनों से अंतराष्ट्रीय मीडिया में यह ख़बर है की असम के चाय बागानों में काम करने वाले मजदूरों के हालात बहुत दयनीय है.  चाय मजदूरों के बच्चे कुपोषण से जूझ रहे हैं,  चाय बागानों के प्रबंधन अपने मजदूरो को बुनियादी सुविधा भी मुहैया नहीं करवा पा रहा है.

रिपोर्ट में जो सब से परेशान करने वाली बात कहा गया है वोह यह की असम के चाय बागानों के मजदूरों की खस्ता हालत देखने के बाद बहुत से अंतर्राष्ट्रीय चाय कंपनी अब असम की चाय खरीदने से पर्हेस कर रहे हैं. अगर रिपोर्ट में खा गया यह बात सही है तो फिर असम सरकार और चाय बागानों को भी खतरे की घंटी को अनुसना नहीं करना चाहिए.

लेकिन अफ़सोस की बात यह है की इस रिपोर्ट के छपने और इन्टरनेट पे आने के बाद असम के किसी भी नेता, सरकार या चाय बगान से सम्बन्ध रखने वाले संगठनों ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई.

यहाँ तक की स्थानीय मीडिया भी इस तरह की रिपोर्ट को स्थान देना मुनासिब नहें समझता है. हाँ इतना ज़रूर हुआ की इसी संदर्भ में असम से सांसद गौरव गोगोई ने बस ट्वीटर पर एक ट्वीट ज़रूर किया और अपने ज़िम्मेदारी पूरी कर ली. चाय बगानों से वोट हासिल कर सांसद बने कामख्या प्रसाद तासा से भी सम्पर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन उन की और से खामोशी ही मिला.

उम्मीद है इस लेख के बाद इन राजनेताओं की आंखे खुले और उन मजदूरों के लिए कुछ कदम उठाए जो दिन रात एक कर असम के चाय बागानों के लिए काम करते हैं,और पूरी दुनिया में असम को अपनी पहचान दिलाते हैं.

 

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