असम के गोर्खाओं की मांग, एनआरसी में मिले स्थानीय समुदाय का दर्जा

गुवाहाटी

एनआरसी के नवीकरण की प्रक्रिया में असम में रहने वाले गोर्खा लोगों को स्थानीय समुदाय घोषित करने की गोर्खा स्वायत्त परिषद मांग समिति ने मांग उठाई है| समिति के अध्यक्ष गोर्खाफा हर्क बहादुर छेत्री ने कल खानापाड़ा में आयोजित ‘रैथानी गोर्खा भेला’ बैठक में यह मांग सामने रखी|

उन्होंने कहा, “ एनआरसी के नवीकरण की प्रक्रिया में असम में रहने वाले गोर्खा लोगों को बिना किसी भेद-भाव के यहाँ का स्थानीय समुदाय घोषित किया जाए| साथ ही असम समझौते के तहत आधार वर्ष 24 मार्च 1971, गोर्खा लोगों पर लागू नहीं होना चाहिए क्योंकि असम में रहने वाले गोर्खा यही के स्थानीय निवासी है|”

उन्होंने कहा, “अवैध बांग्लादेशियों और विदेशियों को खदेड़ने के लिए छेड़े गए असम आंदोलन में गोर्खा लोग भी शामिल हुए थे और उन्होंने भी अपने प्राणों की आहुति दी थी|”

छेत्री ने असम सरकार से यह सवाल किया है कि आखिर क्यों असम आंदोलन में शामिल गोर्खा समुदाय को असम समझौते के तहत रखकर उन्हें अवैध विदेशी कहा जा रहा है? उन्होंने इस बात को मानने से साफ इनकार करते हुए कहा, “असम सरकार को एनआरसी में गोर्खा समुदाय को राज्य के स्थानीय समुदाय का दर्जा देना होगा|” मांग पूरी नहीं होने पर उन्होंने 18 अक्टूबर से आमरण अनशन की भी चेतावनी दी है|

गोर्खा स्वायत्त परिषद मांग समिति द्वारा आयोजित ‘रैथानी गोर्खा भेला’ में तकरीबन 15,000 गोर्खा लोगों ने हिस्सा लिया| इस आयोजन में तमांग, लिम्बू, खम्बू राय, याखा देवान, खास, भुजेल, ठाकुरी, मंगर, गुरुंग और नेवार नामक 10 स्थानीय गोर्खा संगठन भी शामिल हुए| इसके अलावा गैर सरकारी संगठनों ने भी इस आयोजन में हिस्सा लिया|

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