असम बीजेपी में बगावत: बागी नेता बनाएंगे तृणमूल बीजेपी

गुवाहाटी      

MANZAR ALAM-GUWAHATI-2By   Manzar Alam

दो दिन पहले हम ने अपने लेख में लिखा था, कि असम में बीजेपी तीन खेमे में बंटी हुई है जिस के चलते आने वाले दिनों में पार्टी को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है |  और दो दिन बाद वोह सही साबित हो गया | असम गण परिषद से चुनाव पूर्व समझौता औत सीटों के बंटवारे को ले कर असम बीजेपी में बगावत हो गया है | बागी नेताओं ने पार्टी के इस फैसले से नाराज़ हो कर नई पार्टी बनाने की घोषणा कर दी है साथ यह भी फैसला | नई पार्टी का नाम तृणमूल बीजेपी रखने का फैसला किया गया है | बीजेपी से बगावत करने वाले नेताओं की यह पार्टी उन सभी 26 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जो असम गण परिषद को दी गई हैं।

दो दिन पहले का लेख:  बीजेपी के लिए सब से बड़ी मुश्किल पार्टी के भीतर है । पार्टी तीन खेमों में बंटी हुई दिखाई देती है । केन्द्रीय नेत्रित्व को भी इस का एहसास है लेकिन इस तोड़ का फिलहाल कोई जोड़ नज़र नहीं आता है । अगर यह तीन खेमों को एक साथ मिलाने में पार्टी कामयाब नहीं होती है तो पार्टी को इस का नुक्सान उठाना पड़ सकता है ।          पूरी लेख पढ़ने के लिए क्लिक करें

बीजेपी से बगावत कर अलग होने वाले नेताओं में शामिल बागी नेता बिश्‍वजीत फुकन ने कहा कि पिछले दो चुनाव की तरह इस बार भी पार्टी ने जमीनी कार्यकर्ताओं की राय को नजरअंदाज किया है, जिस से हम नाराज़ है । हम अगले कुछ दिनों में तृणमूल बीजेपी के उम्‍मीदवारों के नाम का ऐलान भी कर देंगे।

यह बात अपनी जगह सही है कि बीजेपी से बगावत कर निकले इन बागी नेताओं को तृणमूल बीजेपी का गठन करने से फौरी तौर पर बहुत बड़ा फायदा नहीं होगा, लेकिन बीजेपी को जो नुक्सान होगा उसे छोटा नहीं कहा जा सकता है |

बीजेपी राज्य में “इस बार सत्ता नहीं तो फिर कभी नहीं” के फार्मूले पर चुनाव लड़ रही है | ऐसे में पार्टी को हर एक्शन के पीछे उस का रिएक्शन को पहले समझना होगा , नहीं तो पार्टी को एक चोटी सी ग़लती से भी बड़ा नुक्सान उठाना पड़ सकता है |

खबर यह भी आ रही है की, बीजेपी से नाराज़ हो कर जन्मी तृणमूल बीजेपी को कांग्रेस का हिमायत हासिल है | अगर इस खबर में सच्चाई है तो फिर पार्टी के भीतर बीजेपी के खेल और बिगड़ सकता है |

हालांकि, बीजेपी के शीर्ष नेतृत्‍व ने इस बारे में अब तक कुछ नहीं कहा है। असम गण परिषद पहले भी एनडीए में शामिल हो चुकी है। 2011 में 126 सीटों पर हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 6 सीटें मिली थीं, जबकि असम गण परिषद ने 9 सीटों पर जीत दर्ज की थी। कांग्रेस ने 68 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी, लेकिन इस बार जो एग्जिट पोल आए हैं, उनमें बीजेपी को अपने साथी घटक के साथ मिल कर सत्ता के करीब पहुँचने की संभावना जताई गई है।

राज्‍य में पिछले 15 सालों से कांग्रेस सत्ता में है और इस समय तरुण गोगोई मुख्यमंत्री हैं। बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनेवाल को राज्य में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया है। लेकिन इस बार बीजेपी और कांग्रेस दोनों के लिए 63 का जादूई नंबर छूना नामुमकिन नहीं लेकिन मुश्किल ज़रूर है |

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http://www.nesamachar.in/assam-assembly-election-sarbananda-and-himanta-give-fight-to-congress/5933/

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