असम का विधान सभा चुनाव, बीजेपी के लिए क्यों है महत्वपूर्ण !

गुवाहाटी 

MANZAR ALAM-GUWAHATI-2By-Manzar Alam 

देश के पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के साथ साथ बीजेपी के लिए भी एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है। लेकिन असम का विधान सभा चुनाव,  बीजेपी के लिए क्यों है महत्वपूर्ण यह सब से बड़ा सवाल है ?

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जिन पांच राज्यों में चुनाव हो रहे हैं वह राज्य सत्तारूढ़ भाजपा के लिए दो कारणों से बहुत महत्वपूर्ण हैं। एक तो वह उनमें से एक भी राज्य में सत्ता में नहीं है और दूसरे यह कि भाजपा एक लंबे समय से इन राज्यों में अपना राजनीतिक पैर जमाने की कोशिश कर रही है।

इन चुनावों में यह अनुमान हो सकेगा कि केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार स्थापित होने से भाजपा को राज्यों में राजनीतिक रूप से कोई फायदा पहुंच रहा है या नहीं। इन राज्यों में पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुदुचेरी शामिल हैं।

sonowalhimanta-1भाजपा के लिए सबसे बड़ा चुनावी चुनौती अगले वर्ष सामने आएगा जब देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश और पंजाब में चुनाव होंगे। भाजपा और विपक्षी दलों ने अभी से ही सारी तैयारियां शुरू कर दी हैं। पंजाब में दिल्ली की तरह अरविंद केजरीवाल की पार्टी आम आदमी पार्टी धीरे-धीरे एक बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभर रही है। भाजपा और कांग्रेस दोनों लिए यह पार्टी एक बड़ा राजनीतिक चुनौती बन सकती है।

राज्य में भाजपा की सारी जद्दोजहद अपना पैर जमाने तक सीमित हो सकती है। भाजपा ने अपनी सारी शक्ति असम पर केंद्रित कर रखी है और उम्मीद कर रही है कि बदलाव की इच्छा को हवा दे कर सत्ता में कब्जा किया जा सकता है।

स्थिति स्पष्ट नहीं है कि हवा किसके पक्ष में है । केरल में मुसलमानों और ईसाइयों की संख्या 50 प्रतिशत से अधिक है। लोगों में बदलाव की जबरदस्त इच्छा हे। तमिलनाडु में भाजपा का मुख्यमंत्री जयललिता से गठबंधन न हो सका। अब अकेला चुनाव लड़ रही है। पुदुचेरी में कांग्रेस और ऐआईडीएमके की सरकारें बनती रही हैं।

केवल असम ही एक ऐसा राज्य बचा है जहां से भाजपा को काफी उम्मीदें हैं. एक तो यहाँ पिछले 15 वर्षों से कांग्रेस की सरकार है और लोग बदलाव चाहते हैंI लेकिन पिछले दो वर्षों में केंद्र की मोदी सरकार ने कोई भी ऐसी पहल नहीं की जिस से असम की जनता में पार्टी के प्रति भरोसा बढ़ताI अब केवल मोदी का जादू और बीजेपी में शामिल हुए दो ताकतवर नेता हिमंत विश्व शर्मा और सर्वानंद सोनोवाल ही पार्टी को सत्ता के ग्ल्यारे तक पहुंचा सकते हैं I

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