असम विधान सभा चुनाव: कांग्रेस बनाम हिमंत और सोनोवाल

गुवाहाटी

असम विधानसभा चुनाव में इस बार बीजेपी और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर है। अगर यह कहा जाए कि इस टक्कर में एक तरफ पूरी कांग्रेस पार्टी है और दूसरी तरफ डॉ. हिमंत विश्व शर्मा और सर्वानन्द सोनोवाल हैं तो गलत नहीं होगा I

sonowal   himanta-1एक समय ऐसा था जब हिमंत मुख्यमंत्री गोगोई की आँख का तारा हुआ करते थे। सालों से कांग्रेस के लिए हिमंत ही किंगमेकर की भूमिका निभा रहे थे और तरुण गोगोई की दो बड़ी जीत का श्रेय भी उन्हीं को जाता है। लेकिन गोगोई से मनमुटाव के अंत में आखिरकार 28 अगस्त 2015 को हिमंत औपचारिक रूप से बीजेपी में शामिल हो गए। उस दिन जिस तरह दिल्ली से लौटने पर उनके स्वागत के लिए गुवाहाटी हवाई अड्डे पर जनसैलाब उमड़ पड़ा, यह देख कांग्रेस को बेशक अंदाज़ा हो गया होगा कि इस बार चुनाव में  हिमंत ही कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती होंगे। मुख्यमंत्री भले ही यह कहते रहे हो कि हिमंत के कांग्रेस छोड़ने से पार्टी पर कोई असर नहीं पड़ता, लेकिन हकीकत तो यह ही कि कांग्रेस को हिमंत जैसे एक प्रभावशाली नेता की कमी खल रही है।

दूसरी तरफ ऐजीपी को अलबिदा कह बीजेपी का बागडोर संभालने वाले सर्वानंद सोनोवाल हैं जिनके नेत्रित्व में बीजेपी ने लोकसभा चुनाव में अब तक सब से अच्छा प्रदर्शन किया था। सोनोवाल असम की राजनीती की हर जोड़ को न केवल समझते हैं बल्कि उस का तोड़ भी जानते हैं। इन दोनों नेताओं के बीजेपी के साथ जुड़ने के बाद बीजेपी कार्यकर्ताओं में एक नया जोश तो देखने को मिल ही रहा है साथ ही साथ राज्य की जनता भी एक नई सुबह की उम्मीद लगाने लगी है।

अब बीजेपी को इन दोनों नेताओं का पार्टी में शामिल होने का पूरा पूरा फायदा मिलता दिख रहा है। हिमंत विश्व शर्मा के प्रभावशाली व्यक्तित्व को देखते हुए ही बीजेपी ने उन्हें चुनाव प्रचार की कमान सौंपी है। असम में किसी भी पार्टी की चुनावी रैली में इतना जनसैलाब नहीं दिखा जितना हिमंत की रैलियों में देखने को मिला।

खैर चुनाव में तो हार-जीत होती ही है। सरकार चाहे किसी भी पार्टी की बने लेकिन एक बात तो तय है कि पूर्व मुख्यमंत्री तथा असम आंदोलन का नेतृत्व करने वाले प्रफुल्ल कुमार महंत के बाद आने वाले दिनों में असम को हिमंत विश्व शर्मा के रूप में एक नया नेता मिलता दिख रहा है।

कांग्रेस और एजीपी से हाई प्रोफाइल नेताओं के बीजेपी में शामिल होने से पार्टी का कद और बढ़ा है। एजीपी से पार्टी को सर्वानंद सोनोवाल और कई अन्य नेता हासिल हुए तो कांग्रेस से हिमंत विश्व शर्मा जैसे प्रभावशाली नेता। कुल मिलाकर बीजेपी के बढ़ते कद से कांग्रेसी खेमे में हलचल मची हुई है। एक अनुमान के अनुसार इस बार चुनाव में 126 सीटों में से

बीजेपी को 39 से 44
कांग्रेस को 27 से 31
एआईयूडीएफ को 13 से 19
बीपीएफ को 9 से 13
एजीपी को 9 से 13
टीएमसी को 0 से 2, और
निर्दलीय को 0 से 2 सीटें हासिल हो सकती है।

अगर इन आंकड़ों को देखे तो चुनाव में बीजेपी का पलड़ा भारी होने के आसार अधिक नजर आते है। हालांकि चुनाव में आखिरी बाजी कौन मारता है यह तो 19 मई को वोटों की गिनती के बाद ही पता चलेगा।

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