अरुणाचल संकट- न्यायालय का हस्तक्षेप गलत, नियमों की कोइ अनदेखी नहीं हुई, बागी कांग्रेसी विधायकों का दावा

गुवाहाटी 

अरुणाचल विधान सभा के कार्यवाही पर न्ययालय द्वारा रोक लगाने के क़दम को बागी कांग्रेसी विधायकों ने गलत बताया है, और कहा है कि देश के इतिहास में  ऐसा कभी नहीं हुआ है कि विधान सभा और संसद के कार्यवाही पर न्यायालय द्वारा रोक लगाया गया हो. पुल ने कहा की वोह और उन के साथ सभी 21 विधायक गुवाहाटी उच्य न्ययालय में एक याचिका दायर कर न्यायालय के सामने सारी स्थिति साफ़ साफ़ रखेंगे, पुल ने कहा कि “हमें कानून पर भरोसा है, और उम्मीद है कि सारी स्थिती जानने के बाद, अरुणाचल विधान सभा द्वारा की गयी कार्यवाही पर लगाया गया रोक न्ययालय वापस ले लेगा” कालिखो पुल अपने 21 विधायकों के साथ गुवाहाटी में एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित कर रहे थे.

कोर्ट ने यह आदेश स्पीकर की ओर से दाखिल रिट याचिका पर दिया। स्पीकर ने गवर्नर की ओर से 9 दिसंबर को जारी नोटिफिकेशन को चुनौती दी थी। इस नोटिफिकेशन में 24 जनवरी को होने वाले विधानसभा सेशन को 16 दिसंबर को ही बुलाने की बात थी।

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गौर तलब है कि अरुणाचल प्रदेश के गवर्नर जेपी राजखोआ द्वारा विधानसभा का सत्र पहले बुलाने के लिए नोटिफिकेशन जारी करने,  स्पीकर नेबाम रेबिया को हटाने, मुख्यमंत्री नबाम टुकी को वोटिंग के जरिए पद से हटाने और एक असंतुष्ट कांग्रेसी विधायक कालीखो पुल को मुख्यमंत्री के तौर पर चुनने के सभी निर्णयों पर सख्त इतराज़ जताते हुए रोक लगा दी थी। कड़ा रुख दिखाते हुए जस्टिस हृषिकेश रॉय ने कहा था कि पहली नजर में यह संविधान के अनुच्छेद 174 और 175 का उल्लंघन दिख रहा है। ये दोनों अनुच्छेद गवर्नर की ओर से विधानसभा का सत्र बुलाने और सदन में उनके संदेश से जुड़े हैं।

लेकिन बागी विधायकों द्वारा चुने गए नेता कालिखो पुल का कहना है की राज्यपाल ने अनुच्छेद 174  का कोइ उल्लंघन नहीं किया है बल्कि जो क़दम उन्हों ने उठाया और जिस तरह पूरे विधान सभा की कार्यवाही को पूरा किया गया, वोह बिलकुल अनुच्छेद 174 के नियमों के अनुसार किया गया है. और यही बातें वोह अपनी याचिका में न्ययालय के सामने स्पष्ट रूप से रखेंगे, उन्हें उम्मीद है की न्ययालय के सामने जब स्थिती साफ़ होगी तो न्ययालय अपना फैसला ज़रूर वापस लेगा.

राज्यपाल पर लग रहे आरोपों के बारे में पूछे जाने पे कालिखो पुल ने साफ़ किया कि ” किसी के भी विरोध में “महाभियोग” आने पर 14 दोनों के अंदर विधानसभा अध्यक्ष द्वरा सत्र बुलाना होता है, लेकिन यदी विधानसभा अध्यक्ष द्वारा सत्र नहीं बुलाया जाता है, तो राज्यपाल को अधिकार है कि वोह अनुच्छेद 174  के तेहत विशेष सत्र बुलाये और विशेष सत्र बुलाने के लिए ज़रूरी नहीं कि राज्यपाल, समय तय करने के लिए मुख्य मंत्री या विधान सभा अध्यक्ष के साथ विचार विमर्श करे “.

कालिखो पुल ने मुख्य मंत्री नाबम तुकी पर आरोपों की झड़ी लगा दी और मुख्य मंत्री नाबम तुकी को राज्य की खस्ताहाली का ज़िम्मेदार बताया. राज्य की खस्ताहाली का ब्यवरा  देते हुए कालिखो ने कहा कि वर्ष 2013-14 में राज्य का ओवर ड्राफ्ट 449 करोड़ था, वर्ष 2014-5 में 581 करोड़, और वर्ष वर्ष 2015-16 में जून के महीन तक राज्य का ओवर ड्राफ्ट 220 करोड़ हो चुका है. इस से अंदाजा लगया जा सकता है की अरुणाचल प्रदेश किस खस्ता हालत से गुज़र रहा है.

कालिखो पुल ने पत्रकारों के सामने यह साफ़ किया की वोह और उन के समर्थक विधायक आज भी कांग्रेसी हैं और कांग्रेसी ही रहेंगे, बीजेपी में शामिल होने का उन का कोई इरादा नहीं है. उनकी नाराजगी केवल मुख्य मंत्री नाबम तुकी से है. क्योंकि नाबम तुकी के कारण राज्य की वित्त स्थित बद से बदतर होती जा रही है, खज़ाना खाली हो रहा है, कर्मचारियों को सैलरी नहीं मिल रहा है, ठेकेदारों के बिल नहीं पास हो रहे हैं लेकिन व्यक्ती विशेष को लाखों और करोड़ों का फायदा पहुंचाया जा रहा है.

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