बाढ़ के बाद रोगग्रस्त बच्चे, तस्करी का खतरा  

गुवाहाटी

राज्य के हालिया बाढ़ के बाद अब इन इलाकों के बच्चे खास तौर से विभिन्न रोगों से ग्रस्त होने लगे है| इसके अलावा इन बच्चों की तस्करी का खतरा भी बढ़ गया है| अगर सरकार इन बाढ़ ग्रस्त इलाकों में जल्द से जल्द खास कदम नहीं उठाएगी तो बिगड़े हुए हालात की वजह से स्वास्थ्य के अलावा इन इलाकों के बच्चों की शिक्षा पर भी असर पड़ेगा|

बाढ़ में घर बह जाने से इन बच्चों की किताबे भी नष्ट हो गई है| इस तरह की परिस्थिति में पहले भी देखा गया है कि बच्चों की पढ़ाई छूट जाती है और उन्हें बाल श्रमिक बनने पर मजबूर होना पड़ता है| कई बार वे तस्करी के भी शिकार हो जाते है| यह कहना है नॉर्थ ईस्ट सोसाइटी फॉर प्रमोशन ऑफ यूथ एंड मासेस के निदेशक डॉ. चिरंजीव काकोती का| उन्होंने कहा कि बाढ़ के बाद की परिस्थिति पर पुलिस, जिला प्रशासन और बाल कल्याण समितियों को कड़ी नजर रखनी चाहिए|

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अब तक 273 आश्रय शिविरों में 1,25,000 लोग आश्रय ले रहे है| चूँकि 18 साल से कम उम्र के बच्चों को सरकारी आंकड़ों में शामिल नहीं किया जाता इसलिए कितने बच्चे बाढ़ में प्रभावित है इसकी सही जानकारी नहीं है| हालांकि अनुमानतः बाढ़ ग्रस्त लोगों की एक तिहाई संख्या बच्चों की है| इस तरह करीब 12 लाख बच्चे बाढ़ से प्रभावित है और करीब 40,000 बच्चे इन आश्रय शिविरों में दिन गुजार रहे है|

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