अरुणाचल का भूत पहुंचा उत्तराखंड, संकट में हरीश रावत की सरकार

नई दिल्ली

अरुणाचल प्रदेश का भूत अब उत्तराखंड पहुँच गया है, जी हाँ अब उत्तरखंड की हरीश रावत की सरकार पर संकट आ गया  है । अरुणाचल के उस समय के मुख्य मंत्री नाबम तुकी की तरह ही अब उत्तरखंड के मुख्य मंत्री हरीश रावत की सरकार मुश्किल मीन आ गयी है । उन की चार साल पुरानी सरकार के नौ विधायकों ने बगावत के दिया है और बीजेपी के खेमे में चले गए हैं. इन सात विधायकों में पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और कृषि मंत्री हरक सिंह रावत शामिल हैं ।

मुश्किल में हरीश रावत
मुश्किल में हरीश रावत

खबर यह भी आ रहे है कि बागियों की अगुआई कर रहे वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने राज्य मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। इस बीच कांग्रेस के सभी नौ बागी विधायक भाजपा के 26 विधायकों के साथ दिल्ली पहुंच गए हैं। इन सभी को एक चार्टेड प्लेन से दिल्ली लाया गया है। इन सभी विधायकों को गुड़गांव के एक होटल में ठहराया गया है। यह सभी विधायक आज किसी भी समय भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात करेंगे। इनके साथ भाजपा के

दिल्ली पहुंचने पर राज्य के पूर्व मुख्य मंत्री विजय बहुगुणा ने हरीश रावत पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए। वहीं कांग्रेस के बागी विधायक हरक सिंह रावत ने कहा कि हरीश रावत की सरकार गिरने के बाद राज्य में एक बेहतर सरकार बन सकेगी।

हालांकि कांग्रेस नेता हिमेश खरकवाल ने कहा कि कांग्रेस सरकार के पास पूर्ण बहुमत है और रावत सरकार पूरी तरह सुरक्षित है। दूसरी ओर राज्य के सीएम ने भाजपा पर हॉर्स ट्रेडिंग का आरोप लगाया है।

उधर देर रात भाजपा विधायकों ने कांग्रेस के बागी विधायकों के साथ सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए राज्यपाल केके पॉल से मुलाकात की। उन्होंने कांग्रेस सरकार की बर्खास्तगी की मांग की। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट के मुताबिक राज्यपाल के समक्ष 35 विधायकों की परेड कराई गई। इसके बाद केंद्रीय पर्यटन राज्यमंत्री महेश शर्मा के साथ सभी 35 विधायक दिल्ली रवाना हो गए।

हरक सिंह रावत के मुताबिक उनके साथ बगावत करने वाले कांग्रेसी विधायकों में विजय बहुगुणा, शैलारानी रावत, कुंवर प्रणव चैंपियन, प्रदीप बत्रा, अमृता रावत, सुबोध उनियाल, शैलेंद्र मोहन सिंघल और उमेश शर्मा हैं।

गौरतलब है कि उत्तराखंड में विधानसभा की कुल 70 सीटें हैं, एक सीट नामित हैं और उसे जोड़ कर सीटों की संख्या 71 पहुंच जाती है। कांग्रेस के पास बहुमत से एक सीट ज्यादा 36 सीटें हैं। बीजेपी के पास 28 सीटें हैं तो बीएसपी की झोली में 2 सीटें गई थीं। अन्य के खाते में 4 सीटें हैं।

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