एक ऐसा गावं जहां मुस्लिम समुदाए करता है रामलीला का मंचन

शान्तीपुर- उत्तराखंड

देश भर में नवरात्रि मान्या जा रहा है. नवरात्री के दौरान देशभर में कई जगहों पर रामलीला का मंचन किया करने का रिवाज है. रामलीला का मंचन देखने के लिए आज भी हज़ारों की संख्या में भीड़ इकट्ठी होती है. लेकिन हम जिस रामलीला मंचनके बारे में बताने जा रहे हैं वह देश भर में अपने तरह का इकलौता है मंच है जहां रामलीला का मंचन करने वाले कलाकार मुस्लिम सुम्दाये के होते हैं. गांव के हिंदू समाज के लोग भी रामलीला के मुस्लिम कलकारों को पूरा सहयोग करते हैं .

एक ऐसा गावं जहां मुस्लिम समुदाए करता है रामलीला का मंचनउत्तराखंड के शांतिपुरी स्थित एक बेहद पुराना गांव तुर्कागौरी का नाम पूरे देशभर में केवल इसलिए जाना जाता है, क्योंकि इनकी इस अनूठी पहल की वजह से भाईचारे का संदेश मिलता है. यहां लगभग 13 सालों के हिंदू और मुस्लिम साथ मिलकर रामलीला का आयोजन कर रहे हैं. राम हो या रावण, सीता हो या फिर मंदोदरी… रामायण के प्रत्येक किरदार में मुस्लिम समुदाय के लोग होते हैं. यह परम्परा लगभग 13 वर्षों से चला आ रहा है. एकता और सौहार्द का उदाहरण आप इस तरह भी देख सकते हैं कि पिछले कई सालों से तुर्कागौरी के रामलीला कमेटी के अध्यक्ष भी सिर्फ मुस्लिम समाज से ही बन रहे हैं.  गांव का हर कोई सदस्य चाहता है कि रामलीला का मंचन कराने की जिम्मेदारी सिर्फ उन्हें ही मिले.

बीते 10 सालों से रामलीला कमेटी के अध्यक्ष अशरफ अंसारी रहे हैं. इसके बाद लियाकत अंसारी को 2014 में अध्यक्ष बनाया गया है. वर्तमान में भी रामलीला मंचन की जिम्मेदारी उन्हीं के हाथों में है. नवरात्रि के शुरू होते ही रामलीला की टीम द्वारा 8 से 9 दिन तक लगातार रामलीला का मंचन किया जाता है. इसमें दशरथ पुत्र राम के जन्म होने, 14 वर्ष वनवास, राम-हनुमान मिलाप, लंका दहन आदि का मंचन करते हैं। इस गांव आस-पास के इलाकों से सैकड़ों-हजारों लोग रामलीला का मंचन देखने के लिए एकत्रित होते है.

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: