नोट बंदी की घोषणा के बाद से अब तक देश भर में 47 लोगों की मौत

गुवाहाटी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 500 और 1000 के नोट बंदी की घोषणा के बाद से अब तक देश में 47 लोगों की मौत हो चुकी है| इस घोषणा के बाद से ही देशभर के नागरिकों को परशानियाँ झेलनी पड़ रही है|

एटीएम या बैंक की लंबी कतारों में घंटों खड़े रहने पर कुछ लोगों की जान चली गई जबकि कुछ लोगों की हर्ट अटैक से मौत हो गई| वहीं सात लोगों ने परेशानी से तंग आकर आत्महत्या कर ली| कुल 47 मृतकों में दो साल से कम उम्र के 5 बच्चे भी शामिल है|

झारखंड के राम चंद्र पासवान की घंटों लाइन में खड़े रहने से मौत हो गई| 70 वर्षीय पासवान मोहम्मदगंज के अपने एसबीआई बैंक अकाउंट से पेंशन की रकम निकालने गए थे| दोपहर बाद लाइन में खड़े रहते हुए ही उनकी मौत हो गई|

मंगलवार की रात लवकुश नामक एक और शख्स की मौत हो गई| उसके घर की माली हालत अच्छी नहीं थी और उसके पिता दैनिक मजदूरी करते थे| लेकिन नई मुद्रा नीति की वजह से उनके पास काम नहीं बचा था|

वही महाराष्ट्र के 53 वर्षीय डाकिया तुकाराम तानपुरे की मौत हर्ट अटैक की वजह से हो गई| महाराष्ट्र के ही नांदेद जिले के दिगंबर कासबे ने पैसों के लिए घंटों लाइन में खड़े रहते हुए ही दम तोड़ दिया|

इधर पंजाब के सुखदेव सिंह की मौत ऐसे समय में हुई जब 4 दिन बाद उनकी बेटी की शादी होनी थी| सुखदेव सिंह की विधवा ने बताया कि “हमने बेटी की शादी के लिए जो रकम जमा की थी वह कोई भी नहीं ले रहा था जिस वजह से मेरे पति परेशान थे| इसी बीच उन्हें सीने में दर्द शुरू हुआ और उनकी मौत हो गई|”

सुरेश सोनार नामक एक और शख्स की बैंक में पुराने नोट नहीं बदल पाने पर हार्ट अटैक से मौत हो गई| इस शख्स को अपनी बेटी के तिलक समारोह के लिए पैसों की बहुत जरुरत थी|

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में 17 वर्षीय एक बीएसएफ जवान ने इस वजह से आत्महत्या कर ली क्योंकि  उसकी माँ उसे खुले पैसे नहीं दे पाई|

उत्तरप्रदेश के ही मेनपुरी में तेज बुखार से पीड़ित एक वर्षीय कुश को अपनी जान इसलिए गंवानी पड़ी क्योंकि 500 रुपए के नोट पर बैन की वजह से डॉक्टरों ने उसका इलाज नहीं किया|

इसी राज्य में 8 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण सुनने के बाद हर्ट अटैक से एक व्यवसायी की भी मौत हो गई|

तेलंगाना के 75 वर्षीय लक्ष्मीनारायणा 1.7 लाख रुपए आंध्र बैंक में जमा करवाने गए थे| लेकिन दो घंटे से अधिक समय उन्हें कतार में रहना पड़ा जिससे उनकी मौत हो गई| बैंक में वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग से कतार की व्यवस्था नहीं की गई थी|

तेलंगाना की ही 55 वर्षीय कंदुकुरी विनोदा ने इसलिए आत्महत्या कर ली क्योंकि उसे लगा कि अब उसकी 54 लाख की नकद जमा राशी किसी काम की नहीं रही| उसने अपने पति के इलाज और बेटी के दहेज़ के लिए जमीन बेचकर यह नकद राशी ली थी|

मध्यप्रदेश के हलके लोधी ने फसल के लिए खाद और सही समय पर बीज नहीं खरीद पाने पर आत्महत्या कर ली|

वही गुजरात के 69 वर्षीय एक शख्स की मौत बैंक में लंबी कतार में घंटों खड़े रहने पर हर्ट अटैक से हुई| गुजरात के ही 47 वर्षीय बरकत शेख नामक किसान की मौत पुराने नोट बदलवाने के लिए लाइन में खड़े रहते समय हर्ट अटैक से हुई|

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: