असम में 16 वर्षों में 239 गैंडे मारे गए- वन मंत्री प्रमिला रानी ब्रह्मा

गुवाहाटी

पिछले 16 वर्षों में असम में कुल 239 गैंडे मारे गए हैं, इस बात की जानकारी वन मंत्री प्रमिला रानी ब्रह्मा ने कांग्रेस विधायक अजंता नियोग के एक सवाल का जवाब में गुरुवार विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान दिया I

वन मंत्री ने बताया कि  ‘वन कर्मचारियों का मनोबल बहुत कमजोर है। उनके पास मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। ट्रांजिट कैंप छिन्न-भिन्न अवस्था में है और पेयजल की कोई सुविधा नहीं है। उन्हें हर महीने राशन तक नहीं मिलता है । मंत्री ने कहा ‘विभाग ने अस्थाई कर्मचारी रखे हैं, लेकिन दुर्भाग्य से उन्हें नियमित रुप से पगार नहीं मिलती। ऐसा कहा जाता है कि वर्दी के लिए धन मंजूर किया गया, लेकिन वर्दी उन्हें नहीं मिला।

वन मंत्री ने बतया के इन सब मुद्दों पर उन्हों ने मुख्यमंत्री के साथ चर्चा की क्योंकि राज्य में पहली बार सत्ता में आए बीजेपी की सरकार गैंडों के अविध शिकार रोकने को लेकर गंभीर हैं।

वन मंत्री ने जानकरी डेट हुए कहा कि .303 राइफल जैसे हथियारों समेत उपकरण बहुत पुरानी हो चुकी हैं और ज्यादातर समय गोलियों की कमी रहती है। हमें आधुनिक उपकरण, अच्छे ट्रांजिट कैंप, वर्दी, जूते व अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की जरूरत है। मेरी पहली प्राथमिकता शिकार रोकना है, लेकिन मैं यह दावा नहीं कर सकती कि मैं शिकार को पूरी तरह से खत्म कर सकूंगी।

ब्रह्मा ने कहा कि गैंडे की सींग के औषधीय गुण के चलते इनके लिए एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय गिरोह काम कर रहा है। असम में एक सींग डेढ़ लाख रुपये और इससे अधिक कीमत में बिकती है। अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करते ही इसकी कीमत करोड़ रुपये को छू जाती है। म्यामांर में कीमत दो करोड़ रुपये और चीन में तीन करोड़ रुपये है। इसलिए जब तक हम इस गिरोह को नहीं तोड़ते, शिकार की छिटपुट घटनाएं जारी रहेंगी।’

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